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Benefits of Instant Green Coffee

Benefits Of Instant Green Coffee

 

Green Coffee is becoming important medicinal drink in health and wellness industry.

Most of us think that brown color of coffee is due to brown color of coffee seeds. But in reality coffee seeds have green color; it is after roasting process that seeds become brown results in brownish coffee. So green coffee beans are ‘natural’ unroasted beans. The same coffee beans but not roasted .It is found that green coffee beans are good source of antioxidant chlorogenic acid .Green coffee tastes like green tea but its antioxidant are beneficial for treatment of number of diseases. Chlorogenic Acid is considers as boon for health particularly Obesity ,  B.P. , Bacterial Infections , Alzheimer etc.

 Chlorogenic acid decreases the absorption of carbohydrates in the body by which helps to check obesity. One can take green coffee two to three times a day, even it is safe to take it in the morning. It increases the metabolic process of the body which results in good digestion which means no unnecessary fat deposition in body and full energy. 

One can use lemon extract with green coffee, just mix the lemon juice in green coffee it will help to increase the speed of fat burning process. Green Coffee has small quantity of caffeine, so it is safe to drink it. Green coffee helps to check sugar. Green Coffee consumption increases platelets which mean it will not allow cholesterol formation, so will check blood pressure and heart diseases. It is known as great mood booster. Green Coffee can help cancer patients. It helps to improve memory. Alzheimer patients (It is a disease of brain which destroys memory, ability to think and doing simplest things)   can take it along with medicines.

 

Foodarc “Instant Green Coffee” is Instant & Sugar Free Green Coffee . Just add one sachet of green coffee in one cup hot water ,stir and drink .

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Constipation – Causes and Treatment

                       

 Constipation – Causes and Treatment

 

Constipation is a common cause of painful stool pass or painful defecation. Number of reasons are responsible for constipation , insufficient fiber diet , low liquid intake ,stress , side effect of medicines or other health problems . Studies show that women suffers more than men with problem of  constipation. Elderly people of both genders are prone to this disease . Constipation is the result of abnormal behavior of  large intestine . It absorbs too much water from stool which results inadequate contraction of bowel walls to make way for dry stool.

Remedies :

1. Consumption of  green gram, old rice, garlic, wheat gram juice, grapes ,guava, seasonal fruits, high fiber diet, asafoetida, Phyllanthus emblica gartn, Terminelia chebula Retz, long pepper,dry ginger, green leafy vegetables and lukewarm water.

2. Consumption of high fiber diet an sprouts .

3.drink  plenty of fluids and water .

4. Drink luke warm water 2-3 glasses , early in the morning .

5.  Regular exercise and walking

6. Walk for about 30 minutes daily

7. Do not skip breakfast i.e.eat  adequate breakfast .

8.  Don’t suppress the urge to excrete faeces

9. Set time for your stool and sit in toilet on  that particular time .

10.Use of Triphla (a mixture of Terminalia bellerica, T. chebula and Emblica officinalis ) a herbal medicine for easy bowel .

11. Glass of milk and one spoon desi ghee at bed time in the night will do wonderful job .

12. Bael fruit pulp or powder  use in the night will be very useful .

13. Fennel  or  (meethi saumf) can be taken after food or also can boil in milk and drink  at night .

14. Fig or Anjeer can be useful to cure constipation .

15. Psyllium ( Isabgol) husk can be another good option .Take a spoon full with water at night .

16. Flaxseed or alsi will also help cure constipation ,flaxsee oil also can be use .

Yog Asana can be useful as well name of a few very useful asanas is here :- Mandukasana , Pavanamuktasna , Katichakrasana , Vajrasana and Surya Namaskaar , Agnisar kriya ,shavasana

Meditation will do wonders to constipation patients in the long run . Stress ,trauma and anxiety will cure by just relaxation of mind and in today’s world .Maximum  constipation patients are under stress of different kinds.

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कब्ज़ – कारण एबं उपचार

कब्ज़ – कारण एबं उपचार

पुरी दुनियां में अधिकतर बिमारियों का प्रमुख कारण ‘ कब्ज ‘को माना जाता है। खान -पान में असयंम के कारण ही कब्ज मनुष्य को शिकार बनाती है और सयंमित खान -पान आपको इस बिमारी से निजात दिलवा देता है। अलग -अलग दवाईयां लोग प्रयोग करते हैं कब्ज से छुटकारा पाने के लिए ,असर भी होता है लेकिन अधिकतर प्रयास थोड़े समय बाद निष्फल हो जाते हैं क्योकि कब्ज खान -पान से उपजी हुई बिमारी  है और खान -पान में सुधार ही कब्ज का पक्का इलाज है। दवाइयों के साइड- इफ्फेक्ट भी बहुत होते हैं इस लिए कुछ देसी नुस्खे जो भारत में हज़ारों सालों से सफलता पूर्बक प्रयोग किये जाते हैं बिना साइड – इफ्फेक्ट  के , उनका प्रयोग भी फायदे मंद है।

1 . पहला प्रयोग है रात में एक लीटर या अधिक पानी ताम्बे के बर्तन में भर कर रखना और सुबह सूरज उदय से पहले बासी मुंह अर्थात बिना कुला किये घूँट -घूँट करके पीना ,  70 -80 % लोगों की कब्ज सहित पेट कि अन्य  कई बिमारियों का इलाज सिर्फ इस एक प्रयोग से हो जायेगा ,शर्त यही है कि ये प्रयोग रोज करें।  बड़े और बच्चे सभी के लिए ये लाभ कारक है।

2 . रात में सोने से पहले त्रिफला चूर्ण पानी के साथ लेने से भी फायदा होता है लेकिन इस चूर्ण को खाने से पहले और बाद में  1. 30 घंटे तक  दूध का सेवन नहीं करना है। ये चूर्ण सवेरे भी लिया जा सकता है जब आप खाली पेट पानी पिएंगे। चूर्ण खाने में अगर दिक्क्त महसूस करते हैं तो रात को एक गिलास पानी  में चूर्ण भिगो कर रख ले सबेरे गिलास का पानी पी लें और गिलास में नीचे बैठा चूर्ण फेंक दें।

3 . गुल कंद का प्रयोग भी कब्ज में बहुत लाभ दायक होता है , इसे दूध के साथ लिया जा सकता है रात को। बाकि दोपहर  में  खा सकते हैं खाने के बाद ।

4 . हरड़ का प्रयोग भी किया जा सकता है इसका चूर्ण भी मिलता है और हरड़ का सूखा फल भी मिलता  है।   हरड़ चूर्ण गर्म पानी के साथ लें , हरड़ फल को  चूसना चाहिए और फिर चबा जाएँ।

5 . खाने के बाद सोंफ का प्रयोग तथा गुड़ का प्रयोग भी कब्ज हटाते हैं। गौ -दूध में सौंफ काढ़ कर पीने से भी लाभ होता है।

6 . पपीते के पक्के फल खाने से भी कब्ज में लाभ होगा।

7 . दोपहर में भोजन के बाद छाछ पीने से भी कब्ज से आराम मिलता है।

8 . अंकुरित अनाज का सेवन भी कब्ज में फायदा करता है।

9. रात को तेज शक़्कर और देसी घी डाल कर दूध पीना भी कब्ज में फायदा करता है

10. आंव्ला किसी भी रूप में चाहे फल के रूप में या चटनी और अचार आदि के रूप में पाउडर के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं। . आंव्ले का मुरब्बा भी खाया जा सकता है। आजकल आंवले का  जूस भी मार्किट में मिल जाता है ,अगर इसके साथ एलोवेरा का जूस भी पिया जाये तो कब्ज का नामोनिशान ही मिट जाता है। ये दोनों जूस सुबह खाली पेट 1-2 चमच्च पानी के गिलास में डाल कर पीने चाहिए। फिर दो घंटे तक कुछ ना लें। आंवला जूस में हल्दी भी डाल कर प्रयोग कर सकते हैं।

11 . गेहूं का ज्वारा पेट के अधिकतर रोग ख़ास करके कब्ज का राम बाण इलाज है ,इस के लिए आपको एक ही आकार की 9 छोटी -छोटी क्यारियां बनानी हैं। रोज एक क्यारी में गेहूं के दानो की विजाई करनी है 10 बे दिन 1 नंबर क्यारी में उगी हुई गेहूं जड़ समेत उखाड़ कर झाड़ने के बाद पानी से धो लें फिर चाहे तो ओखली में कूट कर या फिर मिक्सी के प्रयोग से चटनी की तरह पीस कर उसे निचोड़ ले , जो जूस प्राप्त होगा उसे पी लें। गेहूं के ज्वारे का जूस प्राकृति का उपहार है मानव जाति के लिए।

12 . कच्चा सलाद भी कब्ज को समाप्त करने में बहुत सहायक होता है। सलाद के रूप में गाजर ,मूली,शलजम ,चुकंदर ,आंवला ,बंद गोभी आदि का प्रयोग किया जा सकता है, हो सके तो रात के भोजन में सलाद तथा अंकुरित अनाज अधिक  मात्रा में  शामिल करें और कब्ज को दूर भगाएं।

इसके साथ ही स्ट्रेस और चिंताओं से बचें। आजकल कब्ज के अधिकतर मामलों में मानसिक दवाब और चिंता खान -पान के साथ बराबर की  जिम्मेदार हो गयी हैं।

 

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स्टीविया क्या है? स्टीविया के स्वास्थ लाभ क्या हैं?

What is Stevia ? What are benefits of Stevia? / स्टीविया क्या है? स्टीविया के स्वास्थ लाभ क्या हैं?

भारत अब दुनियां की मधुमेह यानि शुगर  कि राजधानी  बनने जा रहा  है। सही पढ़ा है आपने दुनिया में मधुमेह रोगियों की संख्या सबसे अधिक तेज़ी के साथ भारत में  बढ़ रही है। कारण कोई भी हों लेकिन मधुमेह के रोगियों के खाने पीने पर काफी पाबंदियां लग जाती हैं उनमें से सबसे प्रमुख है “मीठा खाना बंद ” और भारत जैसे त्यौहार पसंद देश में मीठे पर पाबंदी का अर्थ है जिंदगी का नीरस हो जाना। परिणाम स्वरुप चाह कर भी स्वभाव के कारण लोग  मीठा छोड़ नहीं पाते और मधुमेह के दुष्प्रभाव मनुष्य का जीना दूभर कर देते हैं।

वर्तमान समय में स्टीविया , चीनी(sugar ) का अनोखा और सुरक्षित विकल्प बन कर उभरा है। स्टीविया के पत्तों का प्रयोग किया जाता है जिस पौधे के पत्ते प्रयोग करते हैं उसका नाम है ‘स्टीविया रिबाउडियाना ‘ मुख्यतः ब्राज़ील तथा पैराग्वे में ही पाया जाता था लेकिन   अब भारत में भी जोर- शोर से इसकी  खेती होने लगी है।  भारत में अभी इसकी खेती की शुरुआत ही  हुई है इस लिए ये महंगी है परन्तु शुगर रोगियों के लिए ये वरदान से कम नहीं। अमेरिका समेत कई देशों ने स्टीविया पर शक किया और वैन भी लगा दिया था लेकिन सभी प्रकार के टेस्ट पास करके स्टीविया ने अपने सुरक्षित होने का प्रमाण दिया और परिणाम स्वरुप स्टीविया आज पूरी दुनिया में निधड़क प्रयोग किया जाता है। आप हैरान होंगे ये जान कर कि स्टीविया चीनी से 200 -300 गुणा अधिक मीठा होता है लेकिन इसकी मिठास नुकसान दायक नहीं है  शुगर रोगियों को ही नहीं बल्कि मोटापे से ग्रस्त लोग भी इसका प्रयोग करके  छरहरा यानि पतला शरीर फिर से प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि इसमें कैलोरीज ना के बराबर होती हैं साथ ही ये अधिक मीठा खाने वालों को शुगर /मधुमेह का रोगी बनने से भी बचाता है।

 

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पाइल्स (Piles) क्या है? आयुर्वेदिक तरीके से पाइल्स का उपचार कैसे करें?

  1.                                                             पाइल्स (Piles) क्या है? आयुर्वेदिक तरीके से पाइल्स का उपचार कैसे करें? 

  2. पाइल्स/बवासीर क्या है  ?

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  4. बवासीर या पाइल्स या Hemorrhoid /  मूलव्याधि आदि नामों से जानी जाने वाली दर्दनाक और खतरनाक बिमारी अघिकतर हमारे गलत रहन -सहन ,गलत खान-पान और गलत व्यवहार के कारण होती है,हो सकता है कि ये आपको अटपटा लगे लेकिन सच यही है।  अगर किसी भी मनुष्य को ठीक से रहना , बैठना और कहना आ गया तो ये बिमारी कभी भी आपके शरीर को अपना शिकार नहीं बना सकती क्योंकि  इस  बिमारी   की जड आपका खराब पेट ही माना जाता है , चाहे कब्ज हो  या फिर बार -बार शौच जाने की आदत बवासीर या पाइल्स के सबसे बडे कारक यही माने जाते हैं।  बढ़ती उम्र से भी इसका कारण हो  सकती है।  कई लोगों को शौक होता है शौचालय  में इंग्लिश सीट के ऊपर बैठ कर अखवार या  मैगज़ीन पढने का ,तो कई लोग  मोबाइल लेकर शोचालय में काफी समय विताते हैं ऐसे लोगों  को भी बवासीर अपना शिकार बनाती है। शौच के बाद अगर ठीक ढंग से गुदा की सफाई ना हो तो बवासीर हो सकती है।   गर्भवती महिलाओं को भी ये बिमारी घेर सकती हैं लेकिन डलिवरी के बाद ये समस्या खत्म हो जाती है सही खान -पान और दिन चर्या से। 
 
इस बिमारी को नामुराद बिमारियों कि श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि ये बहुत ही कष्ट कारक बिमारी है। इस बिमारी के परिणाम स्वरुप गुदा (anus )के अंदर तथा बाहरी हिस्से की शिराओं में सूजन आ जाती है , कुछ समय बाद वही सूजन मस्सों का रूप ले लेती है। ये मस्से कई बार दर्द  का कारण बनते हैं और कई बार इनमें से रक्त स्राव भी होता है। शौच जाने पर अगर कोई ज़ोर लगाता है तो गुदा के अंदर बने हुए मस्से बाहर आ जाते हैं तब स्थिति और भी कष्ट कारक हो जाती है। ये बिमारी एक जनरेशन से दूसरी जनरेशन को भी जाती है अर्थात वशांनुगत रोग (hereditary disease) के रूप में भी जानी जाती है। 
 
पाइल्स से मिलती जुलती बिमारी है फिशर ,  दोनों बिमारियां गुदा से सम्बंधित होने के कारण भ्र्म पैदा करती हैं। इस भ्रम को दूर करने के लिए या तो  डॉक्टर की सलाह लें  या फिर फिशर और पाइल्स पहचान सीख लें। फिशर में गुदा यानी anus में कट या क्रैक लग जाता है जिस कारण फिशर के रोगी को भी रक्त स्राव और दर्द दोनों होते हैं परन्तु पाइल्स में मस्से बनते हैं यही आसान सा तरीका है फिशर और पाइल्स को पहचानने का। 

बवासीर के लक्षण –

शौच जाने पर मल के साथ म्युकस या रक्त का आना। गुदा के आस-पास गाँठ  करना या फिर सूजन का अनुभव करना। गुदा द्वार पर और गुदा के आस-पास खुजली अनुभव करना। शौच जाने के बाद भी गुदा द्वार पर भार का अनुभव करना कि फिर से शौच जाना चाहिए। गुदा द्वार पे तथा आसपास छोटे -छोटे मस्सों का उभरना, बैठने और चलने में कठिनाई आती है।  
  1. इलाज 

बवासीर  के बहुत कम मामले ऐसे होते हैं, जिनमें सर्जरी की जरूरत होती है। अधिकतर  बवासीर दवाओं से ही ठीक हो जाती है । एक से दो महीने तक लगातार इलाज करने से पाइल्स की समस्या को खत्म किया जा सकता है। प्रॉक्टोपाईल्स कैप्सूल बवासीर के रोगियों के लिए अमृत के समान औषधि के रूप में उभर कर समाज के सामने आई है। प्रॉक्टोपाईल्स कैप्सूल पूर्णतया आयुर्वेदिक हैं और बवासीर रोगी जो रक्त स्राब , असहनीय दर्द और जलन से पीड़ित हैं जड़ी – बूटियों से निर्मित  आयुर्वेदिक दवाई का प्रयोग  शुरू कर सकते हैं। प्रॉक्टोपाईल्स में नीम , जिमीकंद ,यष्टिमधु ,हरितकि ,घृत कुमारी  ,मुक्ताशुक्ति भस्म ,अरिष्टक ,शुद्ध सफटिका तथा रसवंती आदि जैसे उत्तम आयुर्वेदिक पदार्थों को निश्चित मात्रा  मिश्रित करके दवाई के रूप में त्यार करके उपयोग के लिए उपलब्ध करवाया जाता है। हज़ारों लोग प्रॉक्टोपाईल्स कैप्सूल को प्रयोग करके बवासीर से छुटकारा पा चुके हैं। आपको याद रखना होगा की बवासीर को आयुर्वेदिक् जड़ी -बूटियों द्वारा ख़त्म किया जा सकता और खुशहाल जीवन फिर से जिया जा सकता है। 
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